Read this article in Hindi to learn about prerequisites of successful effective communication.

प्रभावपूर्ण संचार किसी भी व्यवसाय के लिए जीवन रक्त है क्योंकि एक संचार प्रक्रिया में जब एक सन्देश सम्प्रेषक (सन्देश भेजने वाले) से प्राप्तकर्त्ता की ओर प्रवाहित होता है तो इसके प्रवाह में सन्देश भेजने वाले के व्यवहार का अंश भी प्रवाहित होते है ।

एक संचार तभी प्रभावपूर्ण होगा जब वह अपने उद्देश्य की प्राप्ति में सफल होता है, अर्थात् सन्देश भेजने वाला सन्देश प्राप्तकर्त्ता पर अपना प्रभाव अंकित करता है । इस हेतु आवश्यक है कि सम्पूर्ण सम्प्रेषण अथवा संचार प्रक्रिया में सम्प्रेषित सन्देश साफ, स्पष्टच अर्थपूर्ण हो अर्थात् उसमें किसी भी प्रकार की अशुद्धता न हो व उसकी अन्तिम क्रिया प्रतिपुष्टि (Feedback) पूर्ण व अनुकूल हो अर्थात् एक प्रभावपूर्ण संचार से हमारा अभिप्राय सन्देश को व्यक्तियों, समूहों, संगठनों तक पहुँचाने, निवेदन फरने, प्रोत्साहित करने एवं प्रतिष्ठ अर्जन के उद्देश्यों से संचारित करने से है । प्रभावी सम्प्रेषण में प्रेषित सन्देश पूर्ण, स्पष्ट, सही व अर्थपूर्ण होने के साथ-साथ सम्प्रेषक एवं प्राप्तकर्त्ता के समय की बचत करने वाले व उनके उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होते हैं ।

व्यवसाय में संचार प्रभावी हो इसके लिए कुछ सिद्धान्तों को लागू करना आवश्यक है कोई भी सन्देश बनाने के लिए निर्धारित सिद्धान्त मार्ग-दर्शन का कार्य करते हैं । दूसरे शब्दों में, इन सिद्धान्तों को प्रभावी संचार की आधारशिला कहा जाता है । आधुनिक प्रबन्ध में इन सिद्धान्तों को सात सी (Seven C’s) कहा जाता है ।

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ये सिद्धान्त पूर्णता (Completeness), सक्षिप्तता (Conciseness), विचारणीयता (Consideration), विशिष्टता (Concreteness), स्पष्टता (Clarity), शिष्टता (Courtsey) एवं शुद्धता (Correctness) है । प्राचीन विद्वानों ने भी संचार को प्रभावी बनाने के लिए इनका पालन किया । कीथ डेविस (Keith Davis) ने एक स्थान पर लिखा है कि ”आज के युग में बिना उचित संचार के व्यवसाय की सफलता की कामना करना दिन में स्वप्न देखने के समान है ।”

प्रभावपूर्ण संचार के सिद्धान्तों की व्याख्या करने से पहले यह समझ लेना आवश्यक है कि सफल प्रभावपूर्ण संचार की आवश्यक शर्तें क्या है ?

सफल प्रभावपूर्ण संचार की पूर्व शर्तें (Prerequisites of Successful Effective Communication):

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सफल प्रभावपूर्ण संचार की शर्तें अग्रलिखित हैं:

(1) अनुभूति (Perception):

संचार भेजने वाले को यह बात मालूम होनी चाहिए कि उसके द्वारा सम्प्रेषित सन्देश किस प्रकार से प्राप्त किया जायेगा । संचार भेजने वाला सदैव सन्देश प्राप्तकर्त्ता की प्रतिक्रिया की अपेक्षा करता है । इस कारण वह भेजे गये सन्देश को उसी के अनुरूप ढालता है । एक सम्प्रेषक हमेशा सन्देश प्राप्तकर्त्ता की प्रतिपुष्टि (Feedback) का विश्लेषण कर सन्देश में सम्भावित भ्रम को दूर करने का प्रयास करता है ।

(2) परिशुद्धता (Precision):

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एक संचार प्रक्रिया में सन्देश भेजने वाला व सन्देश प्राप्त करने वाला अपने-अपने विचारों का मिलान करते हैं । जब दोनों अभिव्यक्ति की क्रिया पूर्ण कर लेते हैं तो अपने-अपने दिमाग में एक समान मानसिक चित्र निर्मित कर लेते हैं ताकि सन्देश की यथार्थता बनी रहे ।

(3) विश्वसनीयता (Credibility):

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एक सम्प्रेषक का सन्देश सदैव विश्वसनीय होता है । सन्देश प्राप्त करने वाले को सन्देश की वास्तविकता पर विश्वास होता है । वह सदैव उस सूचना का विश्वास करता है जिसे सम्प्रेषक ने सम्प्रेषित किया है, साथ ही साथ सन्देश प्राप्त करने वाले को सन्देश भेजने वाले के इरादे पर विश्वास हो जाता है ।

(4) नियन्त्रण (Control):

एक सम्प्रेषक सन्देश को इस प्रकार सम्प्रेषित करता है कि सन्देश प्राप्त करने वाला भेजे गये सन्देश के अभिप्राय को यथार्थ रूप में समझ सके । एक सम्प्रेषक अपने उद्देश्य के अनुरूप अपनी मानसिक स्थिति को बदलकर अन्य किसी कार्यवाही के लिए प्रेरित कर सकने में सक्षम होता है ।

(5) सौहार्द्रपूर्णता (Congeniality):

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एक सन्देश भेजने वाला हमेशा सन्देश प्राप्त करने वाले से उसके चाहने अथवा न चाहने के बावजूद सौहार्द्रपूर्ण सम्बन्ध बनाये रखना चाहता है । एक अच्छा सम्प्रेषक सदैव अपने सन्देश प्राप्त करने वाले के मन में सम्मान एवं सद्‌भावना बनाये रखता है एक सम्प्रेषक विचारों में मतभेद होने पर भी सन्देश प्राप्त करने वाले के साथ सदैव सम्प्रेषण क्रिया हेतु तैयार रहता है ।

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